गुंडिचा मंदिर पुरी 6 साल बाद खुला: दर्शन समय, ₹10 टिकट और एंट्री नियम

पुरी का श्री गुंडिचा मंदिर 30 सितंबर 2026 को लगभग छह साल बाद सामान्य श्रद्धालुओं के लिए फिर खुल गया। मंदिर प्रशासन के अधिकारियों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार दर्शन का समय सुबह 6 से शाम 5 बजे है। 2 अक्टूबर तक प्रवेश निःशुल्क है; 3 अक्टूबर से ₹10 प्रति व्यक्ति शुल्क लागू करने की घोषणा है।

पुरी के गुंडिचा मंदिर का प्रवेश द्वार और बाहरी परिसर
गुंडिचा मंदिर का संग्रहित दृश्य, सितंबर 2024। यह 2026 में दोबारा खुलने के दिन की तस्वीर नहीं है। फोटो: Aliva Sahoo / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0। आकार घटाकर WebP में बदला गया; संशोधित चित्र इसी लाइसेंस के अंतर्गत है।

मुख्य बातें

  • 30 सितंबर को पूजा-अनुष्ठान के बाद मंदिर दोबारा खोला गया।
  • इसे मुख्य जगन्नाथ मंदिर के खुलने की खबर न समझें।
  • PTI की 30 सितंबर की रिपोर्ट में SJTA के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाढ़ी के हवाले से रोज सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक आने का समय बताया गया है।

गुंडिचा मंदिर कब खुला और क्या बदला?

30 सितंबर को पूजा-अनुष्ठान के बाद मंदिर दोबारा खोला गया। PTI और अन्य समकालीन रिपोर्टों के अनुसार 2020 में कोविड के दौरान सामान्य प्रवेश बंद हुआ था; बीच के वर्षों में रथ यात्रा के अवसर पर श्रद्धालुओं को प्रवेश मिलता रहा। अब सामान्य दिनों में भी परिसर देखने का अवसर मिला है।

इसे मुख्य जगन्नाथ मंदिर के खुलने की खबर न समझें। दोनों अलग मंदिर हैं और उनकी दर्शन व्यवस्था भी अलग है। यह गाइड गुंडिचा की नई प्रवेश व्यवस्था के लिए है।

दर्शन का समय: सुबह 6 से शाम 5 बजे

PTI की 30 सितंबर की रिपोर्ट में SJTA के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाढ़ी के हवाले से रोज सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक आने का समय बताया गया है। TOI की उसी दिन की रिपोर्ट भी यही समय देती है।

दोबारा खुलने वाले दिन पूजा के बाद द्वार खुलने का समय सामान्य दैनिक समय से अलग था। पहली सुबह की खबर को रोज का खुलने का समय न मानें। अंतिम प्रवेश का अलग समय सत्यापित नहीं हुआ है, इसलिए शाम 5 बजे पहुँचकर प्रवेश मिलने की उम्मीद पर यात्रा न बाँधें।

₹10 टिकट कब से और किसे छूट?

30 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक शुरुआती तीन दिनों का प्रवेश निःशुल्क बताया गया है। 3 अक्टूबर से सामान्य प्रवेश शुल्क ₹10 प्रति व्यक्ति रखने की घोषणा है। यह गुंडिचा परिसर का प्रवेश शुल्क है, मुख्य जगन्नाथ मंदिर का दर्शन टिकट नहीं।

उम्र-सीमा में रिपोर्टों का शब्दांकन अलग है। PTI ने मुख्य प्रशासक के सीधे बयान में 5 वर्ष तक के बच्चों और 80 वर्ष या उससे अधिक आयु वालों को छूट बताई है। TOI ने 5 से कम और 80 से अधिक लिखा है तथा दिव्यांग श्रद्धालुओं की छूट का भी उल्लेख किया है। ठीक 5 या 80 वर्ष के यात्री के लिए काउंटर पर लागू नियम की पुष्टि करें।

उम्र या दिव्यांगता प्रमाण का अनिवार्य प्रारूप स्पष्ट नहीं मिला है। उपलब्ध प्रासंगिक पहचान-पत्र साथ रखना उपयोगी होगा, लेकिन इसे नया दस्तावेजी नियम न समझें। सभी वरिष्ठ नागरिकों का प्रवेश मुफ्त होने का अनुमान भी न लगाएँ। भुगतान से पहले काउंटर पर शुल्क देखें और रसीद लें।

प्रवेश द्वार, मोबाइल और जूते की व्यवस्था

OdishaBytes ने पुरी SP के हवाले से सिंहद्वार से प्रवेश की व्यवस्था बताई है। यहाँ सिंहद्वार से मतलब गुंडिचा मंदिर का प्रवेश द्वार है, मुख्य जगन्नाथ मंदिर का सिंहद्वार नहीं। निकास के लिए मौके पर लगे संकेत और कर्मचारियों के निर्देश मानें; सभी द्वार खुले होने का अनुमान न लगाएँ।

उसी रिपोर्ट में जूते और मोबाइल रखने की निःशुल्क सुविधा तथा दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए रैंप का उल्लेख है। मोबाइल जमा करने की सुविधा को अंदर फोन या फोटोग्राफी की अनुमति न समझें। कैमरा, अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान और प्रवेश-पात्रता के नियम द्वार पर पूछें।

रैंप होने से पूरे परिसर में बिना सीढ़ियों की पहुँच, व्हीलचेयर उपलब्धता या प्राथमिकता-प्रवेश की गारंटी नहीं मिलती। चलने में कठिनाई वाले सदस्य साथ हों तो सहायता और अंदर के रास्ते की जानकारी पहले लें।

सामान्य दिनों में यहाँ किसके दर्शन होंगे?

रथ यात्रा के दौरान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा मुख्य मंदिर से गुंडिचा आते हैं और लगभग एक सप्ताह यहाँ विराजते हैं। वर्ष के बाकी समय वे यहाँ स्थायी रूप से नहीं रहते। इसलिए अक्टूबर की सामान्य यात्रा को रथ यात्रा के समय तीनों विग्रहों के दर्शन जैसा न समझें।

धार्मिक परंपरा गुंडिचा को जन्मवेदी से जोड़ती है। यह आस्था और मंदिर-परंपरा का कथन है, पुरातात्विक रूप से सिद्ध जन्मस्थान का दावा नहीं। परिसर का महत्व इसी रथ यात्रा संबंध और परंपरा को समझकर देखने में है।

TOI की ताजा रिपोर्ट में परिसर में रथ यात्रा के रथों के तीन पहिए प्रदर्शित किए जाने का भी उल्लेख है। प्रदर्शन की वर्तमान स्थिति मौके पर देखें।

जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा कैसे पहुँचें?

मुख्य जगन्नाथ मंदिर से दूरी रिपोर्टों में लगभग 2.6–3 किमी बताई गई है। दोनों अलग परिसर हैं, इसलिए गुंडिचा को यात्रा का अलग पड़ाव रखें। स्थानीय ऑटो या टैक्सी लेते समय गंतव्य स्पष्ट रूप से ‘गुंडिचा मंदिर, पुरी’ कहें और किराया पहले तय करें। यहाँ किसी तय किराये या विशेष बस सेवा का दावा नहीं किया गया है।

पैदल जाने का निर्णय दूरी, गर्मी, बारिश और परिवार की चलने की क्षमता देखकर करें। केवल नक्शे की दूरी से बुजुर्गों के लिए सफर आसान मान लेना ठीक नहीं होगा।

दोनों मंदिर एक दिन में देखने की योजना

समय हो तो सुबह मुख्य जगन्नाथ मंदिर के दर्शन, उसके बाद आराम और फिर गुंडिचा का पड़ाव रखा जा सकता है। यह व्यावहारिक सुझाव है, तय समय वाला दर्शन पैकेज नहीं। मुख्य मंदिर की दैनिक पूजा और कतार के कारण कार्यक्रम बदल सकता है।

पहले दर्शन में देर हो जाए तो गुंडिचा पहुँचने के लिए भागदौड़ न करें। नई व्यवस्था के शुरुआती दिनों में कतार का स्थिर अनुमान उपलब्ध नहीं है। वापसी की ट्रेन या उड़ान के बहुत पास मंदिर-यात्रा न रखें।

मुख्य मंदिर के प्रवेश नियम, महाप्रसाद और ठहराव की तैयारी हमारी पुरी जगन्नाथ मंदिर गाइड में अलग दी गई है।

पुरी जगन्नाथ मंदिर: दर्शन, महाप्रसाद और ठहराव गाइड

छह साल की बंदी को कैसे समझें?

बंदी की शुरुआत कोविड काल से जुड़ी बताई गई है। TOI के अनुसार कोविड प्रतिबंध हटने के बाद लंबे समय तक बंद रहने का एक स्पष्ट संयुक्त आधिकारिक कारण नहीं बताया गया; कुछ अधिकारियों ने मरम्मत से हुई देरी का उल्लेख किया। इसलिए पूरी अवधि को केवल मरम्मत का परिणाम बताना सही नहीं होगा।

यात्रा से पहले क्या दोबारा देखें?

3 अक्टूबर या उसके बाद जाने वाले यात्री ₹10 शुल्क लागू होने की स्थिति और छूट काउंटर पर फिर जाँचें। द्वार पर प्रदर्शित समय और वर्तमान निर्देश इस लेख से नए हों तो उन्हें प्राथमिकता दें।

यह जानकारी 1 अक्टूबर 2026 को अधिकारियों के हवाले वाली समाचार रिपोर्टों से मिलाई गई है। इस जाँच में नया लिखित SJTA संचालन-आदेश उपलब्ध नहीं हो सका। इसलिए फीस की छूट, अंतिम प्रवेश, निकास और सहायता सुविधाओं की ऐसी बारीकियाँ नहीं जोड़ी गई हैं जिनकी पुष्टि नहीं हुई।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गुंडिचा मंदिर का सामान्य समय क्या है?

अधिकारियों के हवाले वाली 30 सितंबर की रिपोर्टों में सुबह 6 से शाम 5 बजे बताया गया है। यात्रा वाले दिन द्वार की सूचना फिर देखें।

₹10 टिकट कब से लगेगा?

घोषित व्यवस्था के अनुसार 2 अक्टूबर 2026 तक प्रवेश निःशुल्क और 3 अक्टूबर से सामान्य शुल्क ₹10 प्रति व्यक्ति है।

क्या सभी वरिष्ठ नागरिकों को मुफ्त प्रवेश मिलेगा?

ऐसा न मानें। PTI के अनुसार सीमा 80 वर्ष या उससे अधिक है; TOI में 80 से अधिक लिखा है। ठीक 80 वर्ष की उम्र पर काउंटर से पुष्टि करें।

क्या जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा हमेशा यहाँ रहते हैं?

नहीं। वे रथ यात्रा के दौरान कुछ दिनों के लिए गुंडिचा आते हैं। सामान्य दिनों में मुख्य जगन्नाथ मंदिर और गुंडिचा की यात्रा अलग अनुभव हैं।

आगे पढ़ें

पुरी जगन्नाथ मंदिर की पूरी गाइड

अन्य मंदिर गाइड

स्रोत और जानकारी की जाँच

जानकारी की समीक्षा: 1 अक्टूबर 2026। बदलने वाले समय, शुल्क और प्रवेश व्यवस्था के लिए यात्रा से पहले संबंधित आधिकारिक सूचना देखें। कथाओं को धार्मिक परंपरा के रूप में प्रस्तुत किया गया है।