पूर्णिमा श्राद्ध 26 सितंबर को, पितृ पक्ष 27 से—दोनों में क्या फर्क है?

2026 में पूर्णिमा श्राद्ध शनिवार, 26 सितंबर को है। अगले दिन, 27 सितंबर को प्रतिपदा श्राद्ध से पितृ पक्ष का कृष्ण-पक्ष क्रम शुरू होता है। दोनों तारीखें अलग अनुष्ठान बताती हैं। सबसे जरूरी बात: पूर्णिमा तिथि पर किसी का निधन हुआ हो, तो केवल “पूर्णिमा श्राद्ध” नाम देखकर 26 सितंबर तय न करें।

नदी में तर्पण करते श्रद्धालु, महालया का संग्रहित दृश्य
महालया पर तर्पण का संग्रहित दृश्य, 19 सितंबर 2017। यह पूर्णिमा श्राद्ध 2026 की तस्वीर नहीं है। फोटो: Rahul Mukherjee / Wikimedia Commons।

मुख्य बातें

  • परिवार में श्राद्ध की तैयारी करते समय अक्सर तीन बातें एक साथ सामने आती हैं—पंचांग की तिथि, पितृ पक्ष की शुरुआत और दिवंगत परिजन की पुण्यतिथि।
  • पूर्णिमा के बाद कृष्ण पक्ष शुरू होता है।
  • महीने का नाम भी भ्रम पैदा कर सकता है।

परिवार में श्राद्ध की तैयारी करते समय अक्सर तीन बातें एक साथ सामने आती हैं—पंचांग की तिथि, पितृ पक्ष की शुरुआत और दिवंगत परिजन की पुण्यतिथि। इन्हें अलग रखने से अनुष्ठान की तारीख, पुरोहित का समय और यात्रा की योजना तय करना आसान होता है।

फिर पितृ पक्ष 27 सितंबर से क्यों बताया जाता है?

पूर्णिमा के बाद कृष्ण पक्ष शुरू होता है। 2026 की प्रकाशित श्राद्ध सूची में 27 सितंबर प्रतिपदा श्राद्ध और 10 अक्टूबर सर्वपितृ अमावस्या है। पूर्णिमा को साथ जोड़कर पूरी अवधि बताने वाले कैलेंडर 26 सितंबर से सूची शुरू कर सकते हैं; प्रतिपदा का क्रम बताने वाले 27 सितंबर से। केवल शुरुआत की headline पढ़ने के बजाय उसके सामने लिखी तिथि देखें।

महीने का नाम भी भ्रम पैदा कर सकता है। लक्ष्मीनारायण मंदिर, लेनासिया के श्राद्ध-परिचय में समझाया गया है कि पूर्णिमांत पद्धति में यह आश्विन कृष्ण पक्ष और अमांत पद्धति में भाद्रपद कृष्ण पक्ष कहलाता है। नाम अलग होने का अर्थ अपने-आप अलग अनुष्ठान-दिन नहीं है।

26 सितंबर का पूर्णिमा श्राद्ध किस लिए है?

भाद्रपद पूर्णिमा पर होने वाले इस अनुष्ठान को प्रोष्ठपदी पूर्णिमा श्राद्ध या श्राद्धी पूर्णिमा भी कहा जाता है। दृक पंचांग के प्रयागराज पृष्ठ पर 2026 की तारीख 26 सितंबर दी गई है। उसके धार्मिक विवरण में यह पूर्णिमा, प्रतिपदा से शुरू होने वाले महालय पक्ष से अलग बताई गई है।

ABP Live के परंपरा-विवरण में इस दिन प्रपितामह से पहले की तीन पीढ़ियों, नांदीमुख पितरों तथा मातृपक्ष के पूर्वजों से जुड़े विधान का उल्लेख है। इसलिए इसे हर परिवार के लिए एक ही प्रकार का सामान्य श्राद्ध समझना सही नहीं। किन पूर्वजों के लिए कौन-सा संकल्प लिया जाए, यह अपनी पारिवारिक परंपरा जानने वाले पुरोहित से तय करें।

पूर्णिमा को निधन हुआ हो तो श्राद्ध कब करें?

दृक पंचांग स्पष्ट करता है कि पूर्णिमा तिथि पर दिवंगत परिजन का महालय श्राद्ध भाद्रपद पूर्णिमा के बजाय अमावस्या श्राद्ध पर किया जाता है। NDTV के आचार्य मदन मोहन से बातचीत वाले विवरण में भी यही अंतर बताया गया है; 2026 में सर्वपितृ अमावस्या की तारीख 10 अक्टूबर दी गई है।

यहाँ बात पितृ पक्ष के महालय श्राद्ध की है। इसे मृत्यु-तिथि पर होने वाले अलग वार्षिक श्राद्ध को रद्द करने या हमेशा अमावस्या पर खिसकाने का निर्देश न समझें। वार्षिक श्राद्ध के लिए दिवंगत व्यक्ति की हिंदू तिथि का अलग निर्धारण होता है। पहली वर्षगाँठ या पहले वर्ष के संस्कार हों तो अपनी स्थिति स्पष्ट करके ही तारीख लें।

उदाहरण के लिए, किसी परिजन का निधन पूर्णिमा पर हुआ था और परिवार अब पितृ पक्ष वाला अनुष्ठान तय कर रहा है। ऐसे में 26 सितंबर का नाम देखकर बुकिंग करने के बजाय पूछें: “हमें महालय श्राद्ध करना है या वार्षिक तिथि-श्राद्ध?” यही छोटा सवाल दोनों अनुष्ठानों को मिलाने से बचाता है।

तैयारी और यात्रा से पहले क्या तय कर लें?

दिवंगत परिजन का नाम, संबंध और उपलब्ध मृत्यु-दिनांक की जानकारी साथ रखें। हिंदू तिथि मालूम न हो तो अनुमान लगाने के बजाय उसका निर्धारण करवाएँ। पुरोहित को यह भी बताएँ कि अनुष्ठान किस शहर में होगा। स्थानीय पंचांग का समय देखें; दूसरे शहर या विदेश के लिए दिख रहा समय भारत में ज्यों का त्यों न अपनाएँ।

श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान संबंधित शब्द हैं, लेकिन हर जगह इनसे बिल्कुल एक जैसी सेवा नहीं समझी जाती। परंपरागत विवरण में तर्पण जल-अर्पण और पिंडदान पिंड अर्पित करने से जुड़ा है। व्यवस्था तय करते समय पूछ लें कि कौन-से कर्म होंगे, सामग्री कौन लाएगा और कितना समय लगेगा।

गया की यात्रा कर रहे हों तो पहले अपनी अनुष्ठान-तिथि निश्चित करें, फिर आने-जाने और ठहरने की योजना बनाएँ। रास्ते और स्थानीय व्यवस्था के लिए हमारी गया पितृ पक्ष यात्रा गाइड पढ़ें। मेले का उद्घाटन और आपके परिवार का श्राद्ध-दिन एक ही होना जरूरी नहीं है।

स्रोत और तथ्य-जाँच

पूर्णिमा की तारीख व अनुष्ठान का अंतर: दृक पंचांग—प्रयागराज, 2026। प्रतिपदा, अमावस्या और परंपरागत व्याख्या: NDTV, 22 सितंबर और ABP Live, 21 सितंबर। पंचांग-पद्धति और अनुष्ठान शब्दावली: मंदिर का श्राद्ध-परिचय। धार्मिक विधान परंपरा के रूप में प्रस्तुत हैं; यह व्यक्तिगत अनुष्ठान का संकल्प-पत्र नहीं है।

फोटो: Rahul Mukherjee / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0। आकार घटाकर WebP बनाया गया; संशोधित तस्वीर इसी लाइसेंस के अंतर्गत है।

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