अनंत चतुर्दशी 2026: अनंत सूत्र में 14 गांठ क्यों होती हैं?

अनंत चतुर्दशी शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा करके 14 गांठों वाला अनंत सूत्र धारण किया जाता है। प्रचलित धार्मिक मान्यता में ये गांठें चौदह लोकों का प्रतीक हैं—और धागा भगवान के प्रति श्रद्धा तथा व्रत के संकल्प की याद दिलाता है।

अनंत शेष की कुंडली पर शयन करते विष्णु का लकड़ी का मूर्तिशिल्प
अनंत शेष पर विष्णु का शयन: भारत से लगभग 14वीं शताब्दी का लकड़ी का मूर्तिशिल्प, स्कॉटलैंड के राष्ट्रीय संग्रहालय में। यह अनंत सूत्र बांधने की रस्म का चित्र नहीं है।

मुख्य बातें

  • हाथ या बाजू पर बंधा यह डोरा देखने में छोटा होता है, लेकिन इसकी परंपरा में पूजा, कथा और संकल्प तीनों जुड़े हैं।
  • अनंत का अर्थ है जिसका अंत न हो। इस व्रत में विष्णु के उसी असीम स्वरूप की उपासना होती है। नवभारत टाइम्स के धार्मिक विवरण में सूत्र की चौदह गांठों को चौदह भुवनों या लोकों से जोड़ा गया है। भक्त इनके माध्यम से समस्त सृष्टि के…
  • रक्षा, सुख और समृद्धि की कामना इस परंपरा का हिस्सा है।

हाथ या बाजू पर बंधा यह डोरा देखने में छोटा होता है, लेकिन इसकी परंपरा में पूजा, कथा और संकल्प तीनों जुड़े हैं। इसे अनंत डोरा या अनंता भी कहते हैं। इसका महत्व समझने के लिए गांठों की संख्या के साथ उस कथा को जानना भी उपयोगी है जो अनंत व्रत के समय सुनाई जाती है।

चौदह गांठों का अर्थ क्या है?

अनंत का अर्थ है जिसका अंत न हो। इस व्रत में विष्णु के उसी असीम स्वरूप की उपासना होती है। नवभारत टाइम्स के धार्मिक विवरण में सूत्र की चौदह गांठों को चौदह भुवनों या लोकों से जोड़ा गया है। भक्त इनके माध्यम से समस्त सृष्टि के पालनहार के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हैं।

रक्षा, सुख और समृद्धि की कामना इस परंपरा का हिस्सा है। इसे धार्मिक विश्वास के रूप में समझें; धागा बांधने से हर संकट निश्चित रूप से दूर होगा, ऐसा परिणाम प्रमाणित तथ्य नहीं है। इसी तरह चौदह गांठों के प्रतीकात्मक अर्थ और व्रत को चौदह वर्ष तक करने की परंपरा आपस में संबंधित होते हुए भी अलग बातें हैं।

सुशीला और कौंडिन्य की व्रत-कथा

प्रचलित कथा के अनुसार, सुशीला ने नदी किनारे महिलाओं को अनंत भगवान की पूजा करते देखा। उनसे विधि समझकर उसने भी व्रत किया और चौदह गांठों वाला सूत्र धारण किया। पति कौंडिन्य ने उस डोरे का महत्व स्वीकार नहीं किया और उसे अग्नि में डाल दिया। कथा आगे उनके जीवन में कठिनाइयों और पश्चाताप का वर्णन करती है।

अनंत भगवान की खोज में निकले कौंडिन्य को अंततः उनका मार्गदर्शन मिला। उन्हें चौदह वर्षों तक श्रद्धापूर्वक व्रत करने का निर्देश दिया गया। इस व्रत-कथा में संकल्प का सम्मान और अहंकार छोड़ने का भाव प्रमुख है। यह धार्मिक कथा का सार है, ऐतिहासिक घटनाक्रम का दावा नहीं।

इसलिए “14 गांठ” और “14 साल” को एक ही नियम समझना ठीक नहीं: पहली बात सूत्र की रचना और उसके प्रतीक से जुड़ी है; दूसरी व्रत के दीर्घकालीन संकल्प से। पहली बार व्रत शुरू कर रहे हों तो परिवार में प्रचलित संकल्प और उद्यापन की विधि पहले समझ लें।

अनंत सूत्र कैसे और किस हाथ में बांधते हैं?

प्रचलित पूजा-विधि में सूती या रेशमी धागे में चौदह गांठें लगाकर उसे हल्दी, केसर या कुमकुम से रंगा जाता है। सूत्र को पहले भगवान विष्णु के सामने रखकर पूजा की जाती है; उसके बाद धारण किया जाता है। फूल, दीप और नैवेद्य अर्पित करने तथा व्रत-कथा सुनने की परंपरा भी है।

भक्ति भारत के विवरण में पुरुषों के दाहिने और महिलाओं के बाएं हाथ में सूत्र बांधने की प्रथा दी गई है। कुछ क्षेत्रीय वर्णनों में कलाई के बजाय बाजू पर बांधना मिलता है। आपके घर में जिस स्थान और विधि से इसे धारण किया जाता है, उसे परिवार के बड़े या पुरोहित से समझकर अपनाएँ।

सूत्र कितने दिन पहनना है और बाद में कैसे रखना है, इसके लिए भी एक अवधि को हर परिवार पर लागू न करें। क्षेत्रीय रीति अलग हो सकती है। पूजा की तैयारी करते समय गांठें गिन लें और धागे की लंबाई इतनी रखें कि उसे आराम से बांधा जा सके।

25 सितंबर की पूजा की तैयारी

भक्ति भारत और जनसत्ता के 2026 विवरण अनंत चतुर्दशी की तारीख 25 सितंबर, शुक्रवार बताते हैं। यह भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी का व्रत है। स्थानीय पूजा-समय के लिए अपने शहर का पंचांग देखें; किसी दूसरे शहर का समय अपने स्थान पर सीधे लागू न करें।

एक दिन पहले पूजा का सूत्र, भगवान विष्णु का चित्र या प्रतिमा और घर की परंपरा के अनुसार पूजा-सामग्री तैयार रख सकते हैं। यदि पहली बार संकल्प ले रहे हैं, तो व्रत, भोजन और उद्यापन से जुड़े प्रश्न पहले पूछ लेने से पूजा के समय भ्रम नहीं रहेगा।

इसी दिन गणेश विसर्जन भी होता है, लेकिन अनंत सूत्र विष्णु-उपासना से जुड़ा है। केवल गणेशोत्सव में शामिल होने के कारण यह व्रत या सूत्र धारण करना अपने-आप आवश्यक नहीं हो जाता। दोनों परंपराओं की पूजा और संकल्प को उनके अपने संदर्भ में समझें।

आगे के त्योहारों और यात्राओं की योजना के लिए RouteTales के त्योहार व मेला लेख देख सकते हैं। सितंबर के अंत में गया जाने की योजना हो तो गया पितृ पक्ष यात्रा गाइड भी उपयोगी है।

स्रोत

तारीख और सामान्य पूजा-परंपरा: भक्ति भारत और जनसत्ता, 23 सितंबर 2026। चौदह गांठों की मान्यता: नवभारत टाइम्स, 18 सितंबर 2026। कथा: भक्ति भारत का व्रत-कथा विवरण। क्षेत्रीय भिन्नताओं का संदर्भ: Ananta Chaturdashi का संदर्भ-संकलन।

फोटो: Osama Shukir Muhammed Amin FRCP(Glasg) / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0। आकार घटाकर WebP बनाया गया है; संशोधित फोटो इसी लाइसेंस के अंतर्गत है।

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